आपके साथ बिताया
हर वो पल याद आता रहेगा
आपका स्नेह, प्रेम
सबक जिंदगी के
सब कुछ तो
याद हैं
खुश तो नही हूँ
पर
दुःख भी प्रकट
नही कर सकता
बस खामोश-सा
रहने लगा हूँ
यह सोच कर
विभाग में आप
साथ नही होंगे
अनचाहे
आँसुओ की
धारा
फूट पड़ती है
गला रुंध जाता है
बस रोकता हूँ
किसी तरह
खुद को
आपकी सीख से
दृढ़ करता हूँ
लेकिन
अभी फिलहाल
खामोश-सा बैठा हूँ
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समर्पित सादर गुरुवर डॉ जयशंकर तिवारी सर को
साहित्य वह है, जो आपको धर्म, जाति, लिंग व क्षेत्रवाद के भाव से ऊपर उठाकर समाज में समता बंधुत्व एकता का भाव प्रकट करे . मानवीय संवेदनाओं से पूर्ण करके प्रत्येक प्राणी से प्रेम करना सिखाये और दलित संस्कृति इसी भाव को लेकर सदियों से लोक कला एवं साहित्य को संजोकर वर्तमान समय में मानवीय संवेदनाओं की सतत निर्मल धारा को बहा रहा है .
Tuesday, 1 August 2017
खामोश-सा बैठा हूँ
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