Tuesday, 1 August 2017

खामोश-सा बैठा हूँ

आपके साथ बिताया
हर वो पल याद आता रहेगा
आपका स्नेह, प्रेम
सबक जिंदगी के
सब कुछ तो
याद हैं
खुश तो नही हूँ
पर
दुःख भी प्रकट
नही कर सकता
बस खामोश-सा
रहने लगा हूँ
यह सोच कर
विभाग में आप
साथ नही होंगे
अनचाहे
आँसुओ की
धारा
फूट पड़ती है
गला रुंध जाता है
बस रोकता हूँ
किसी तरह
खुद को
आपकी सीख से
दृढ़ करता हूँ
लेकिन
अभी फिलहाल
खामोश-सा बैठा हूँ
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समर्पित सादर गुरुवर डॉ जयशंकर तिवारी सर को

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