Friday, 27 January 2017

मैत्रेयी पुष्पा कृत इदन्नमम उपन्यास के सामाजिक सरोकार


                                                                                         प्रदीप कुमार,शोधार्थी, बी0 यू0, झाँसी

                इदन्नमम मूलतः स्त्री की समस्याओं को चलने वाला प्रमुख उपन्यास है, जिसमें मैत्रेयी पुष्पा जी ने बुन्दली धरती का चयन किया है और यहाँ की समस्याओं से सम्पूर्ण भारतीय जनमानस को परिचित कराया है। बुन्देली संस्कृति सभ्यता को लेकर चलने वाला यह उपन्यास समाजिक पहेलुओं शिक्षा, परिवार, विवाह, दहेज आदि को केन्द्र में रखकर जहाँ प्याप्त बुराइयों को उजागर कर चेतना को झकझोरता है, तो वहीं मान सम्मान की रक्षा करने वाले पात्रों का सृजन कर ह्नदय में स्थिरता प्रदान करता है। यह उपन्यास मूलतः तीन स्त्रियों के जीवन को लेकर केन्द्रित है, जिसमें मन्दा (पुत्री) प्रेम (माँ) बऊ (दादी) प्रमुख है। इस सन्दर्भ में इदन्नमम की भूमिका में राजेन्द्र यादव जी कहते है-ष्ष् बऊ (दादी) प्रेम (माँ) और मन्दा,,, तीन पीडि़तों की बेहद सहज कहानी तीनों को समान्तर भी रखती है और एक एक दूसरे के विरूद्व भी।श् 1
वर्तमान समय में भारतीय समाज के परिवार पूरी तरह से बिखर रहे हैं। संयुक्त परिवारों का स्थान अब एकाकी परिवारों ने ले लिया है। इदन्नमम उपन्यास में एकाकी परिवार की झलक अधिक देखाई देती है, केवल पंचम सिंह (दादा) का परिवार एक संयुक्तता की प्रतिमूर्ति है, लेकिन जैसे-जैसे उपन्यास की कथा आगे बढती है,  वैसे ही उनके परिवार में भी द्वेष, ईर्ष्या, स्पष्ट दिखाई देती है। सोनपुरा की रहने वाली बऊ और मन्दाकनी जब श्यामली गाँव के दादा (पंचम सिंह) के घर रहने लगती हैं, तो कका जू (गोविन्द सिंह) दादा का प्रत्यक्ष विरोध करते हुए कहते है-ष्ष् जे डुकरो अपने घर की व्यथा इस गांव मे ले आई। कहीं होता है ऐसा कि किसी के हक के लिये कोई दूसरा अपना मूड़ चिराएं।
अभी कुछ नही बिगड़ा दादा, तुम समझा-बुझाकर लौटा सकते हो इन्हे सोनपुरा।श् 2
गोविन्द सिंह (कका जू) धन के बहुत लालची हैं, वे हर काम को दाम पर तौलते है। जबकि पंचम सिंह (दादा) जी पूरी तरह से ईमानदार समाजिक व्यक्ति है। गोविन्द सिह बऊ की सारी सम्पत्ति बेचकर सारा धन स्वयं के पास रख लेता है। इसी अनैतिकता के पनपने दादा जू और काका जू के मध्य विचार भिन्नता के कारण कटुता बढ़ जाती है और उनके परिवार मे विघरन पैदा हो जाता है।
मिठू बऊ को दादा की तकलीफ उन्ही के शब्दों में बताता है-ष्ष् कि मिठू, हमारे सगे भाई ने हमें बेईमान सिद्व कर दिया। छली, कपटी और ढोंगी बनाकर छोड़ा। गांव ही नहीं असपेर भर में। एरच से कालपी तक। श्यामली से झाँसी तक। नहीं-नहीं, मिठू, दसों दिशाओं में आकाश से पाताल तक, रूख-पेड़ो और नदी-सागर तक, पहाड़-पर्वत तक हमे तो लगता है कि धरती के हर कोने मे पिट रही है हमारी बेइमानी की डुग्डुगी कि पंचम सिंह आदमी इंसान नहीं, डकैत है, ठग है, चोर-भेडि़या है।श्3
आगे मिठू बऊ को कका जू के उन शब्दो को बयाँ करता है जिससे दादा का परिवार खण्ड-खण्ड होकर एकल में तब्दील हो गया-ष्ष् दादा से कह रहे थे कि तुम्हे तो धरम-पुत्र जुधिष्टर बननें का सांेख है तो हम हतिनापुर कब तक हारते रहेगें। और आखरी बात यह कि अब हमें न्यारे कर दों। बहौत रह लिए तुम्हारे माँझे।ष्ष्4
मैत्रेयी जी ने इदन्नमम मे वर्तमान परिस्थितियों को सन्दर्भित कर जीवन्सता प्रदान की है। सत्यता को अपनी लेखनी से उदघाटित किया है, संयुक्त परिवारो क स्थान पर एकाकी परिवारों की अधिकता है। अतः मैत्रेयी जी ने एकाकी परिवार का चित्रण किया है, लेकिन साथ ही मैत्रीय जी ने संयुक्त परिवारों की ओर ध्यान आकृष्ट करवाया है। जो निश्चित की मैत्रेयी जी का सुनहरा स्वप्न रहा होगा।
मैत्रेयी पुष्पा ने शिक्षा पर अधिक जोर दिया है उनके उपन्यास के प्रमुख पात्र मन्दाकनी और मकरन्द साक्षर है। मकरन्द उच्च शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर बनता है, वहीं मन्दाकनी अधिक पढ़ी लिखी नहीं है, लेकिन जिज्ञासु है, उसके अन्तःकरण में पढने की ललक है। वह अपनी अल्प शिक्षा पर भी गर्व करती है तभी तो मकरन्द के पूछनेे पर वह गर्व से उत्तर देती है-ष्ष् तुम पढ़ी हो ?े
कक्षा पाँच तक उसने तुरन्त सगर्व उत्तर दिया।
बस ?
मकरन्द की ष्बसष् उसे बड़ी बुरी लगी। बड़ी तुच्छ। गम्भीर स्वर में बोली, कक्षा पाँच तो सबसे ऊँची कक्षा है हमारे स्कूल की।
होगी ! हमारे श्यामली मे आठ तक का स्कूल है। जूनियर हाईस्कूल श्यामली, जिला, झाँसी। देखा है सड़क पर ?ष्ष्5
मन्दा के पूछने पर मकरन्द बताता है-
ष्ष्हाँ बाहरवी में आ गया। साइंस ले ली थी। बायलॉजी डाक्टरी पढने के लिये बायलॉजी लेनी होती है।ष्ष्6
मन्दा के ह्नदय मे पढने की ललक बहुत थी जिस पर वह अपनी बऊ से कहती है-ष्ष्
बऊ हम पढ़ने जाया करेगें, उसने उत्साह में भरकर कह डाला।
पढबे !
हाँ बऊ! यही स्कूल में। छः मे दाखिल हो जाएँगे।
बऊ दो क्षण मौन हुई देखती रही।
कल से ही जाएँगें बऊ। मकरन्द किताबें ला देगें मोठ से पइसा दे देना।ष्ष्
      मैत्रेयी पुष्पा जी ने शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया है, उनके उपन्यास के कम पढे-लिखे पात्र भी गर्व से शिक्षित होने का प्रमाण देते हैं, उन्होने शिक्षा के उच्च एवं निम्न दोनो स्तरों का अंकन किया है। इस उपन्यास के अन्य पात्रों में दादा, मोदी, चीफ को भी कक्षा छः तक मोठ के जूनियर हाईस्कूल से शिक्षा प्राप्त किया हुआ बताया है। इस प्रकार इदन्नमम के मुख्यतः पात्र पढ़े-लिखे है।
मैत्रेयी पुष्पा जी ने इदन्नमम के माध्यम से विवाह को अनिवार्य रूप से स्पष्ट किया है, उनकी दृष्टि मे विवाह बिना जीवन एक तपसी के समान हो जाता है जिससे न कोई रस होता है और न ही कोई हास्य, विलास होता है। इदन्नमम में जब मकरन्द एवं मन्दाकनी की सगाई होती है तो मैत्रेयी जी ने उसका सजीव चित्र उकेर दिया है-
ष्ष्मन्दाकनी की पक्यात है
मकरन्द की सगाई है आज।
रमतूला बन्जा, टूऊँऽऽ, टूऊँऽऽ
बुलउआ दिए गए।
कुसुमा का स्वर मंगली गीतों से सबसे ऊपर उभर रहा है:
सिया बारी बनरी रघुनन्दन बनरे,
को को बरातै जाँय मोरे लाल।श्8
सगाई होने के बाद जब मकरन्द से मन्दाकनी की सगाई टूट जाती है, तो मन्दाकनी अन्य किसी से शादी करने के लिए तैयार नहीं होती, परन्तु उसकी बऊ निरन्तर ही उसके विवाह के लिए चिन्तित रहती है तथा बार-बार उसके समक्ष विवाह प्रसंग छेड़ती है। उसका पड़ोसी सुगमा का पिता जगेसर भी मन्दा की शादी के सन्दर्भ में कहता है-ष्ष् जगेसर उठे और बोले, महाराज मन्दा ब्याह नहीं करती सो इसे समझायेे जाओ।ष्ष्9
केवल इतना ही नहीं मैत्रेयी जी ने बाल विवाह का भी चित्रण किया है अवधा की पुत्री सिरा देवी सात वर्षीय और उसका दामाद बलदेव भी छोटी ही उम्र के हैं।
मैत्रेयी जी ने विवाह के दोनो सन्दर्भो को बड़ी बारीकी ढं़ग से प्रस्तुत किया है। जब कोई रिश्ता जु़ड़ता तो खुशी का ठिकाना नही रहता है और जब जुड़ा रिश्ता टूटता है तो मानो भविष्य की उम्मीद ही खत्म हो जाती है। ऐसी ही पात्रा के रूप में मन्दाकनी को यहाँ प्रस्तुत किया गया है।
विवाह और दहेज एक खुशी तो दूसरा गमगीत करने वाले शब्द है स्त्री विमर्श में मूल समस्या दहेज ही है। मैत्रीय पुष्पा ने इदन्नमम में दहेज प्रथा पर अत्याधिक प्रहार किया है। इदन्नमम में दहेज पीडि़त कुसमा का कारूणिक चित्रण है। दहेज की पूर्ण राशि न मिलने पर उसका पति यशपाल उसे हेथ दृष्टि से देखता है। उसे पत्नी जैसा स्नेह और अधिकार प्राप्त नहीं है। दहेज के अभाव में वह उपेक्षित है- ष्ष् खोट तो हमारे मतारी बाप का है। वे गरीब काहे को थे ? गरीब थे तो अपनी बिटिया के लिए सुख के सपने काहे देखे ? सपने देखे ही थे तो मान परतिष्ठा वाले घर के लिए उतना दहेज काहे नही जुटा पाये ? काहे नहीं कर पाये पर-वर की इच्छा पूरन ?ष्ष्10
दादा और कक्कों (देवगढ़वाली) आपस मे चर्चा करते हुए धन लोभी यशपाल के सन्दर्भ में कहते है-ष्ष् तुम कहती हो विरूप के कारन नहीं, धन माया के लोभ में त्यागा है। कोई कमी थी हमारे यहाँ खाने पीने की ? ठीक है, गरीब की बिटिया थी, तो क्या ठुकरा देते है ?ष्ष्11
मैत्रेयी जी ने अपने उपन्यास इदन्नमम मे दहेज और दहेज विरोधी दोनो वर्गो के व्यक्तियों का वर्णन किया है। दहेज विरोधी वर्ग के माध्यम से दहेज लाभियों को शिक्षा प्रदान करने का सफल प्रयास किया है। वर्तमान समय में सजग लोग धीरे-धीरे इस कुप्रथा का त्याग कर रहे हैं और आज दहेज जैसी बीमारी से निपटने के लिए युवा वर्ग को आगे आना चाहिए, तभी इसका समूल नाश हो सकता है।
इस प्रकार पूर्णतः देखने पर स्पष्ट हो जाता है कि मैत्रेयी पुष्पा जी का यह उपन्यास समाज में व्याप्त कुरीतियों, अन्ध विश्वासों  धोखाधड़ी, छल कपट पर करारा प्रहार करता है तो वहीं समाज में असमानता, रोग, अस्वच्छता, भष्टाचार से मुक्त होने के लिए निरन्तर संघर्ष की कहानी बयाँ करता है और समता बन्धुत्व, एकता की स्थपना करने में पूर्णतः सफल होता है।

सन्दर्भ-सूची-
1. इदन्नमम- मैत्रेयी पुष्पा, पृष्ठ संख्या- 09, राजकमल (पेपरबैक्स) प्रकाशन, नेताजी सुभाष चन्द्र मार्ग, नई दिल्ली, प्रकाशन वर्ष- 2009।
2. वही, पृष्ठ संख्या- 22
3. वही, पृष्ठ संख्या- 196
4. वही, पृष्ठ संख्या- 196
5. वही, पृष्ठ संख्या- 52
6. वही, पृष्ठ संख्या- 111
7. वही, पृष्ठ संख्या- 57
8. वही, पृष्ठ संख्या- 120
9. वही, पृष्ठ संख्या- 204
10. वही, पृष्ठ संख्या- 100
11. वही, पृष्ठ संख्या- 78

नोट- यह शोध आलेख (बुंदेलखंड मे  साहित्य की  परंपरा: खड़ीबोली एवं बुन्देली के विशेष संदर्भ मे ) मे प्रकाशित हो चुका है ।

 

भारत देश में 26/11 का आतंकवादी हमला एवं डेविड हेडली की भूमिका



प्रदीप कुमार, शोधार्थी (हिन्दी)
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी
गाँधी महाविद्यालय, उरई (जालौन) 285001, उ0प्र0
मो0 7526050125, 8115393117

आज विश्व पटल में आतंकवाद का नाम सुनते ही खूनी संघर्ष, लतपथ लाशें, रोते बिलखते बच्चे, हताहत मानवता के दृश्य आँखों के सामने यकायक छा जाते हैं। भयानक धमाके निर्मम सिर कलम, मनुष्यों को जबरन आग में झोकना, करूण चीख-पुकारें हृदय को झकझोर देती है। तब प्रश्न उठता है कि आखिर आतंकवाद है क्या ? आतंकवाद का शाब्दिक अर्थ हिंसा, लूटपाट आदि के आतंक फैलाकर अपना राजनीतिक उद्देश्य सिद्ध करने की विचारधारा। यह अर्थ निश्चित रूप से संकुचित अर्थ को प्रदर्शित करता है। आतंकवाद राजनीति से प्रेरित हुआ था, लेकिन आज यह हिंसा, आतंक के बल पर दुनिया में भय को कायम कर अपने उद्देश्यों की पूर्ति करना चाहता है। आज यह धर्म, वर्ग के आधार पर अपनी कट्टरता को समाज में स्थापित करना चाहता है। एक तरह से ये मनोरोगी की श्रेणी में आ चुके हैं, क्योंकि आतंक फैलाना कोई विचारधारा नहीं है। विचारधारा तो परिचर्चा की मांग करती है, जो शायद इन आतंकवादियों में नहीं है। आतंकवाद को परिभाषित करते हुए मनोहरलाल बाथम एवं शिवचरण विश्वकर्मा कहते हैं ‘‘आतंकवाद एक सामूहिक अपराध है, जो एक आतंकवादी समूह द्वारा किसी व्यक्ति- विशेष के विरूद्ध न होकर एक व्यवस्था, धर्म, वर्ग या समूह के विरूद्ध होता है। आतंक फैलाने तथा मनोवैज्ञानिक युद्ध की स्थिति निर्मित करने की तकनीक ही आतंकवाद है। आतंकवाद का प्रयोग आतंकी अपने समूह की योजना अनुसार, सहिष्णु अथवा असहिष्णु साधनविहीन समूहों के विरूद्ध अपनी ताकत दिखाने के लिए करता है। वैधानिक शासन-व्यवस्था अथवा विरोधी समूह की प्रतिरोधी क्षमता पर प्रहार कर जगमत को जबरन अपने पक्ष में करने का यह अपराध दीर्घावधि के राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए होता है।’’1
वर्तमान समय में केवल भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व आतंकवाद से हताहत है। भारतदेश में आतंकवादी घटनाएं बहुतायत होती रहती हैं, जिससे निपटना भारत के लिए ही नही अपितु विश्व के लिए कठिन हो गया है। विश्व में कई बड़े आतंकी हमले हुए हैं, जिसमें 26 नवम्बर 2008 को भारत देश के मुम्बई नगरी हुए आतंकी हमले में सम्पूर्ण मानवता को झकझोर डाला। यह हमला बहुत ही सुनियोजित ढंग से किया गया था। इसे आतंक विरोधी अभियान के अन्तर्गत ‘आपरेशन ब्लैक टारनाडो 2008’ के नाम से जाना जाता है। यह हमला मुम्मबई के ताज होटल, नरिमन हाउस, चाबाड़ हाउस समेत कई अन्य स्थलों पर किया गया था, जिसे पाकिस्तानी सरजमीं से संचालित लश्कर-ए-तैयबा के दस खूंखार आतंकवादियों ने अंजाम दिया था। जिसमें तीन दिन चले आपरेशन में नौ आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया, जबकि अजमल कसाब नामक एक आतंकवादी को जिन्दा पकड़ लिया गया। इस आतंकवादी घटना में 166 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।
मुम्बई हमले में इन पाकिस्तानी मूल के दस आतंकवादियों ने सुनियोजित रची गई रणनीति को अंजाम दिया। जबकि इसके पीछे एक ऐसे शख्स का हाथ था, जिसकी पहचान अमेरिकी मूल के निवासी के रूप में हुई। जिसका नाम डेविड हेडली है। लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य डेविड हेडली का असली नाम दाऊद सैय्यद गिलानी था। लेकिन मुम्बई हमले को सुनियोजित ढंग से अंजाम देने के लिए उसने अपनी माता के नाम का सहारा लिया जो अमेरिकी मूल की निवासी थी। जबकि उसके पिता पाकिस्तान मूल के निवासी थे, जो महानिदेशक पद से रिटायर हो चुके थे और उन्हें अपने पुत्र के लश्कर से सम्बन्ध होने की जानकारी थी इसलिए वे हमेशा अपने पुत्र से नाराज रहते थे। लश्कर से सम्बन्ध होने की जानकारी जब डेविड हेडली की पत्नी को मिल जाती है, तो वह इसकी शिकायत पुलिस से कर देती है, जिसके बाद अमेरिकी पुलिस डेविड हेडली को गिरफ्तार कर लेती हैं और 24 जनवरी 2013 को अमेरिका की संघीय अदालत 26/11 के आतंकी हमलों की साजिश और आतंकवादियों को मदद पहुँचाने का दोषी करार देते हुए 35 साल का कठोर कारावास की सजा सुनाती है। इसके बाद डेविड हेडली ने जब अपने गुनाह को कबूला, तब पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की काली करतूत का पर्दा उठा। डेविड हेडली के कबूलनामें को हम घटनाक्रम के आधार पर आगे देखेगें।
डेविड हेडली उर्फ दाऊद सैययद गिलानी के पास अमेरिका का पासपोर्ट होने की वजह से बड़ी आसानी से भारत देश में आने-जाने, रूकने की सुविधा प्राप्त होती रही। भारत में आतंक फैलाने के लिए जिस जमीन का प्रयोग होता है, वह किसी से छिपा नहीं है। डेविड हेडली ने तकनीकि के माध्यम से विभिन्न वीडियोग्राफी कर हमारे देश के अन्दर हमले की भूमि तैयार कर दी थी। जबकि इसके पीछे पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी आई0एस0आई0 व लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख हाफिज सईद का दिमाग था। डेविड हेडली सर्वप्रथम 2006 में आई0एस0आई0 के मेजर इकबाल से लाहौर में मिलता है, जहाँ पर इकबाल भारतीय खूफिया एजेंसी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए कहता है। इस सन्दर्भ में डेविड हेडली कबूलता है- ‘‘मैं 2006 में आई0एस0आई0 के मेजर इकबाल से लाहौर में मिला था। उन्होंने मुझे भारत की खूफिया सैन्य जानकारी एकत्र करने के लिए कहा था।’’2
डेविड हेडली आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ने के बाद 14 सितम्बर 2006 को प्रथम बार मुम्बई आता है और मुम्बई के तारादेव मार्केट में 13500/-रु0 के किराए पर व्यवसायी बनकर ऑफिस खोलता है तथा वह मुम्बई के कई प्रसिद्ध स्थलों के चिन्हित करता है। जहाँ आतंकी घटना का अंजाम दिया जा सके। लेकिन उस समय तक भारत देश के किस भूभाग में आतंकवादी घटना को अंजाम देना है, ऐसी कोई जानकारी उसके पास नही थी। मुम्बई में लगातार बने रहने के लिए 11 अक्टूबर से दिसम्बर 2006 के मध्य लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य तहब्वुर हुसैन राणा उसे दो लाख रूपये उपलब्ध कराता है। इसके पश्चात् लश्कर-ए-तैयबा नवम्बर-दिसम्बर 2007 में मुजफ्फराबाद में एक मीटिंग आहूत करता है। जिसमें भारत देश के अन्दर आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए चर्चा की जाती है। जिसमें मुम्बई, दिल्ली और बैंगलूरू शहरों में आतंकवादी हमला करने पर जोर दिया जाता है और बाद में मुम्बई में हमला करने की सहमति बनती है। इस मीटिंग में डेविड हेडली के साथ लश्कर-ए-तैयबा के मीर साजिद, आई0एस0आई0 के अधिकारी और पाक सेना के बिग्रेडियर स्तर के लोग शामिल हुए थे।
डेविड हेडली सात बार पाकिस्तानी जमीन से सीधे भारत आता है और एक बार संयुक्त अरब अमीरात से भारत देश आता है। निरन्तर विदेश यात्रा करने पर धन का खर्च होना स्वाभाविक है। इसके लिए पाकिस्तान की जमीन से उसे आर्थिक मदद दी जाती है। पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी आई0एस0आई0 के मेजर इकबाल सोलह लाख पच्चीस हजार रूपये हेडली को देता है, जबकि लश्कर-ए-तैयबा का कमाण्डर साजिर मीर चालीस हजार रूपये प्रदान करता है और कई बार वह जाली नोट भी देता है। दैनिक पत्र ‘हिन्दुस्तान’ के अनुसार ‘‘हेडली ने खुलासा किया कि उसे आई0एस0आई0 के मेजर इकबाल, लश्कर-ए-तैयबा के कमाण्डर साजिद मीर और अमेरिका में रह रहे तहव्वुर हुसैन राणा से हमले की तैयारी के लिए धन मुहैया कराया गया था। इसी रकम के जरिए उसने मुम्बई के ताज होटल, नरीमत हाऊस, चाबाड़ हाऊस समेत कई स्थलों की रेकी कर वीडियो बनाए।‘‘3
डेविड हेडली मुम्बई में व्यापारी बनकर शहर का हर कोना छानता है तथा महत्वपूर्ण स्थलों की निरन्तर रेकी कर वीडियो बनाता है। लश्कर का कमाण्डर मुजामिल भट की कश्मीर के अलावा महाराष्ट्र और गुजराज में हमलों करने की योजना थी, जिसमे गुजराज के अक्षरधाम मन्दिर पर विस्फोट करने हेतु वहां की भी रेकी हेडली ने की थी। लश्कर-ए-तैयबा के साजिद की नजर मुम्बई के सिद्ध विनायक मन्दिर पर थी और वह हेड़ली से सिद्ध विनायक मन्दिर का वीडियो बनाने के लिए कहता है क्योंकि उसकी इच्छा मन्दिर में बम धमाका करने की योजना थी। हेडली सिद्ध विनायक मन्दिर के साथ लियोपोल्ड कैफे से लेकर नरीमन हाऊस तक पूरी कोलाबा पट्टी का वीडियो बनाता है तथा वह मुम्बई दौरे करते हुए जीपीएस का प्रयोग करता है। दैनिक पत्र हिन्दुस्तान के अनुसार ‘‘हेडली ने बताया कि उसके आका साजिद ने विशेष तौर पर मुम्बई के सिद्ध विनायक मन्दिर का वीडियो बनाने के लिए कहा था। सजिद मन्दिर उड़ाना चाहता था। इसके बाद मार्च 2008 में दोबारा मुम्बई आने पर उसने लियोपोल्ड के कैफे नरीमन हाउस तक पूरी कोलाबा पटरी का भी वीडियो बनाया। हेडली ने ताज होटल, नौ सैन्य वायु स्टेशन, और दक्षिण मुम्बई में महाराष्ट्र राज्य पुलिस मुख्यालय जैसे कई स्थानों का निरीक्षण किया। उसने मुम्बई दौरांे के दौरान जीपीएस इस्तेमाल किया।‘‘4
मुम्बई में धमाकों की तैयारी करने में संलग्न डेविड हेडली को 03-04 बार इंडसंइड बैंक की नरीमन शाखा के जरिए रकम पहुँचायी जाती है। वह मुम्बई में रहते हुए 2007 में कई बार रिलायंस बेव बर्ल्ड से तहव्वुर हुसैन राणा से बात करता है, जबकि साजिद मीर से वह ई मेल में कोडवर्ड के माध्यम से बात करता है। 2006 से 2009 के मध्य वह हवाई यात्राएँ करते हुए कई सिमों का प्रयोग करता है। अप्रैल मई 2007 में वह ताज होटल की वास्तविकता को जानने हेतु कई बार ताज व ओबेराया होटल में ठहरता है।
डेविड हेडली बम धमाकों की तैयारी में संलिप्त था, कई बार हमले की तैयारी को भी रोका था। ताज होटल में रक्षा वैज्ञानिकों का एक सेमिनार होना था, जिसमंे देश के प्रसिद्ध रक्षा वैज्ञानिक भाग ले रहे थे। यह भनक लश्कर-ए-तैयबा को पड़ गयी थी। जिससें हमले की पूरी योजना बना ली गई थी, लेकिन अन्त में अचानक रक्षा वैज्ञानिकों ने किसी कारण ताज की बैठक को रद्द कर दिया था और क्रूर आतंकवादियों से बच गए थे। दैनिक पत्र हिन्दुस्तान के अनुसार ‘‘हेडली ने बताया कि लश्कर के पास जानकारी थी कि ताज होटल के सम्मेलन कक्ष में भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों की बैठक होने वाली है। हेडली ताज की रेकी कर लश्कर को बैठक की सारी जानकारी दे चुका था। सब कुछ योजना के मुताबिक ही चल रहा था, लेकिन अचानक साजो सामान की दिक्कत के चलते हमले की योजना रद्द करनी पड़ी हेडली ने बताया कि ताज सम्मेलन कक्ष तक हथियारों और आतंकियो का पहुँचना आसान नही होगा। हमले से पहले आंतकियो ने ताज की एक डमी भी तैयार की थी। इसके अलावा वैज्ञानिकों के दल ने भी किसी कारण से ताज में बैठक रद्द कर दी थी।‘‘5
डेविड हेडली भारत देश में व्यापारिक छवि के साथ निवास कर रहा था, उसके ऑफिस के लाइसेंस की अवधि समाप्त होने वाली थी, तब वह 16 जुलाई 2008 को लाइसेंस की अवधि को बढ़वाता है। लश्कर-ए-तैयबा का कमाण्डर जकी उर रहमान दस खूखांर आतंकवादियों को लैडिग साइड के रुप में गेटवे ऑफ इण्डिया का चयन करना चाहता था क्योंकि यह स्थान ताज होटल के बहुत नजदीक था, लेकिन डेविड हेडली ने इन स्थानों को बहुत नजदीक से देखा था इसलिए उसने कक परेड में बुधवार पार्क को चुना जिनमें दस खुखांर आतंकवादियों को ठहराना था क्योंकि यह स्थान झुग्गी झोपडि़यों से घिरा था और आतंकवादियों केा रोकने में सुविधा थी। डेविड की इस सलाह को सभी दहशतगर्द मान जाते है।
मुम्बई हमले की भूमिका तैयार करके डेविड हेडली नवम्बर 2008 में मुम्बई को छोड़कर लाहौर पहुँच जाता है और इस भारत की सरजमी में दस दहशत गर्द मुम्बई के होटलों, सडकों, रेलवे स्टेशनो में खून की होली खेलते है और भारत देश का ताज कही जाने वालों मुम्बई नगरी को लाशों से पाट देते है। आतंकवादी घटना को अंजाम देने के पश्चात् आई एस आई के मेजर इकबाल के आदेश पर डेविड हेडली मुम्बई स्थित ऑफिस को जनवरी 2009 में बन्द कर देता है। आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता की वजह से उसका बहशीकरण दूर नही होता है। बल्कि वह निरन्तर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने लिए जनवरी 2009 में डेनमार्क के अखबार जिलैंड पोस्टन के कार्यालय की रेकी करता है तथा मार्च 2009 में नेशनल डिफेंस कालेज और चाबाड हाउस की भी रेकी करता है।
पाकिस्तान का दोहरा चरित्र उसे आज खुद डुबो रहा है। मुम्बई हमले के कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री हाफिज रजा गिलानी स्वयं डेविड हेडली के घर मिलने गए थे। यह संशय जरूर है कि उसी समय डेविड के पिता का देहान्त हुआ था। तब क्या गिलानी जी उसके पिता के देहान्त के सन्दर्भ में गए थे या 26/11 की आतंकी घटना के साजिशकर्ता को बधाई देने के रुप में गए थे। लेकिन जो भी कुछ हो 26/11 की घटना में पूरी तरह से पाकिस्तान की जमीन का प्रयोग हुआ था। इसके बाद भी आज वही पाकिस्तान खुद के कर्माे में रो रहा है पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए शशि शेखर कहते है-‘‘पेरिस 13/11 को लेकर इतना बवेला मचा हुआ है। मुम्बई में भी तो 26/11 हुआ था? तब न किसी पश्चिमी देश ने हवाई हमलों की बात की और न पाकिस्तान पर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिश की। आज भी मुम्बई में मारे गए 166 लोगों के परिजन इंसाफ का इंतजार कर रहे है, क्यांेकि उसके वास्तुकार पाकिस्तान में आई एस आई के संरक्षण में आराम से रह रहे है। अमेरिका ने हाफिज सईद के सिर पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है, पर वह पाकिस्तान में आजाद धूम रहा है।‘‘6
डेविड हेडली की लश्कर से संलिप्तता का शक होने पर उसकी पत्नी पुलिस से शिकायत करती है और पुलिस उसे अक्टूबर 2009 में शिकागों से पाकिस्तान जाते समय एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लेती है और 24 जनवरी 2013 को मुम्बई हमले की भूमिका में 35 साल की जेल हो जाती है।
इस प्रकार डेविड हेडली के निशाने पर ताज होटल, ओबेराय ट्राइडेंट, लियोपाल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, नरीमनल हाऊस, सिद्धि विनायक मन्दिर, नौसैना बेस, मुम्बई पुलिस मुख्यालय आदि रहते है और वह सभी जगहों की रेकी करके वीडियो बनाता है तथा लगातार 07 बार पाकिस्तान से भारत आता है, लेकिन भारतीय खुफिया एजंेसी को भनक भी नही लगती, जो निश्चित रुप से खुफिया तन्त्र पर अनगिनत सवाल खड़े करता है तथा एजेंसी की उदासीनता को दर्शाता है। भविष्य में भारतीय एजेंसी को सक्रिय रहना चाहिए एवं समस्त भारतीय नागरिकों को आतंकवाद जैसे भय को हृदय से दूर कर सजता होकर इससे निपटने का प्रयास करना चाहिए और यहां यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि आज केवल एक धर्म के लोग आतंक में शामिल नहीं है बल्कि मानवता भारत का दुश्मन देश की तरक्की में अवरोध पैदा करने के लिए आतंकवादी घटना की साजिश कर सकता है। इसलिए पूरे देश को सर्तक, सावधान, सुरक्षित रहने की जरूरत है।
सन्दर्भ:- 1 आतंकवाद: चुनौती और संघर्ष, लेखक-मनोहरलाल बाथम, शिवचरण विश्वकर्मा, प्रकाशक-मेधा बुक्स, एक्स 11, नवीन शाहदरा, दिल्ली, संस्करण-2015
2. हिन्दुस्तान (दैनिक पत्र), वुधबार, 10 फरवरी 2016 कानपुर संस्करण (उ0प्र0)
3. हिन्दुस्तान (दैनिक पत्र), शुक्रवार, 12 फरवरी 2016 कानपुर संस्करण (उ0प्र0)
4. हिन्दुस्तान (दैनिक पत्र), वुधबार, 10 फरवरी 2016 कानपुर संस्करण (उ0प्र0)
5. हिन्दुस्तान (दैनिक पत्र), वुधबार, 10 फरवरी 2016 कानपुर संस्करण (उ0प्र0)
6. हिन्दुस्तान (दैनिक पत्र), सम्पादकीय - लहु के दो रंग नही होते - शशि शेखर, रविवार, 22 नवम्बर 2015, कानपुर संस्करण (उ0प्र0)

नोट - यह शोध आलेख डॉ पुनीत बिसरिया जी की पुस्तक मे प्रकाशित होने वाला है । 

Tuesday, 24 January 2017

वर्तमान भारतीय राजनीति में उत्तर प्रदेश का चुनाव विभिन्न पार्टियों के लिए खुद के बजूद के साथ विचारधाराओं के पोषण की भी चिंता है । ऐसी स्थिति में कोई भी पार्टी खुद पीछे नही रखना चाहती है । वर्तमान की सपा सरकार विगत चुनाव की भाँति इस बार भी घोषणाओं की बौछार कर रही है तथा हाशिए में पड़ी कांग्रेस पार्टी के साथ अपनी नैया पर

Friday, 20 January 2017

भौंकता है

जब- जब देश में चुनाव बोलता है ।
आरएसएस से कोई न कोई भौंकता है ।।

Wednesday, 18 January 2017

जानते हैं पर मानते नही हैं ।

जब भारत देश की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक , धार्मिक उन्नति के आंदोलन की बात करते हैं , तो उसमे सबसे पहला नाम डॉ भीमराव अंबेडकर का आता है । आज हर व्यक्ति बाबा साहेब की नीतियों को स्वीकार कर रहा है, तारीफ कर रहा है , योद्धा स्वीकार रहा है किंतु जैसे ही पटापेक्ष पर पहुँचते है तो अधिकतर सवर्ण मानसिकता के लोग गालियाँ देते मिलते है ।

Friday, 6 January 2017

प्रतिभाओं का निखार करता मथुराप्रसाद महाविदयालय

मथुराप्रसाद महाविद्यालय कोंच(जालौन) में प्रत्येक वर्ष की भाँति  इस वर्ष लगातार जागरूकता पूर्ण कार्यक्रम होने की वजह से छात्र/छात्राओं में दुगुना उत्साह है और इस छोटे से तहसील युक्त कस्बे में नई नई प्रतिभाओं का निखार हो रहा है । खासकर लड़कियों के विकास का प्रेरणास्रोत बना हुआ है । जुलाई-अगस्त में प्रवेश की आपाधापी में विद्यार्थी महाविद्यालय आना शुरू करते हैं अगस्त माह में कक्षाएं सुचारू रूप से प्रारम्भ होती है और 14 सितम्बर को हिंदी विभाग की ओर हिंदी दिवस के अवसर पर " हिंदी भाषा- वर्तमान और भविष्य" विषय पर भाषण प्रतियोगिता कार्रवाई जाती है । हिंदी विभाग द्वारा पुनः 15 दिसम्बर को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर " समाज के उत्थान में डॉ भीमराव अंबेडकर का योगदान" विषय पर निबंध प्रतियोगिता कार्रवाई जाती है । अंग्रेजी विभाग द्वारा 19 दिसम्बर को " विद्यार्थी के विकास में सर्वाधिक भूमिका किसकी होती है -अभिभावक, गुरु या मित्र" विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । इसके बाद बिलकुल वर्तमान विषय को पकड़ते हुए अर्थशास्त्र विभाग की ओर से 21 दिसम्बर को " भारत में नोटबन्दी" विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । प्राचीनता को संवारते संजोते हुए 04 जनवरी को  संस्कृत विभाग की ओर से " नैसर्गिक कन्या शकुंतला- कालिदास के संदर्भ में " विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । NSS के प्रभारी जी ओर से अलग -अलग दिवसों में ग्राम अंडा में कैम्प लगाकर छात्रों को समाज सेवा के लिए प्रोत्साहित किया और कैशलेस व्यवस्था के बारे में ग्रामीणों को स्वमसेवकों के माध्यम से अवगत कराया । छात्रोतथान की कड़ी में शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से 12-13 जनवरी को वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है ।  जैसे-जैसे महाविद्यालय में कार्यक्रम हो रहे हैं छात्रों में नई नई प्रतिभाएं उभर रही है ।
रिपोर्ट- प्रदीप कुमार गौतम
असि0 प्रोफ़ेसर, हिंदी विभाग
मथुरा प्रसाद महाविद्यालय, कोंच

धम्म-पथ

बुद्ध ने कहा— जीवन दुःख है, पर यह अंतिम सत्य नहीं, क्योंकि दुःख-निरोध भी है। तृष्णा से बँधा मन बार-बार जन्म लेता है, और सम्यक दृष्टि उसे मुक...