पाकिस्तान बना बच्चों का हैवान
वर्तमान समय में पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन एक लड़की को नोबेल पुरस्कार मिलने से बौरा गये हैं / जिसकी वजह से अपने गुस्से को मासूम से बच्चों में उतारा / आज पूरा संसार तरक्की की दौड़ में एक -दूसरे को पीछे छोड़ने में लगा हुआ है और विश्व की सर्वश्रेष्ठ शक्ति बनना चाहता है एवं शिक्षा के क्षेत्र में अपना परचम लहराना चाहता है / तब मलाला जैसी युवती स्त्री तथा बच्चों की शिक्षा के लिए काम करती है तो आतंकवादियों को इसमें एतराज क्यों है ?
तब प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या ये आतंकवादी सच में धर्म के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं ? क्या वाकई में ये जनता के हितैषी है ? क्या इनकी माताओं ने इन्हे मासूमों की हत्या के लिए जन्म दिया था ?
सच में इनके अंतःकरण में मानवीय सभ्यता का नाश हो चूका है जो केवल और केवल नफरत, हिंसा ,जैसे जघन्य अपराधों को जन्म दे सकता है /पाकिस्तान में मारे गए बच्चों के अभिभावकों के हृदय की क्या स्थिति होगी उसे समझने में मुझे लगता है कोई बड़ी बात नही होगी क्योंकि यदि ऐसी घटनाएँ हमारे यहाँ होती तो हम अंदाजा लगा सकते है लेकिन इसमें पाकिस्तानी नागरिकों की भी उतनी ही जिम्मेदारी है क्योंकि जो दूसरों से नफरत करते है और दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करते है तो निश्चित ही स्वम को उस मंजर में उलझना पड़ता है यही स्थिति आज पाकिस्तान की है
प्रदीप कुमार गौतम
वर्तमान समय में पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन एक लड़की को नोबेल पुरस्कार मिलने से बौरा गये हैं / जिसकी वजह से अपने गुस्से को मासूम से बच्चों में उतारा / आज पूरा संसार तरक्की की दौड़ में एक -दूसरे को पीछे छोड़ने में लगा हुआ है और विश्व की सर्वश्रेष्ठ शक्ति बनना चाहता है एवं शिक्षा के क्षेत्र में अपना परचम लहराना चाहता है / तब मलाला जैसी युवती स्त्री तथा बच्चों की शिक्षा के लिए काम करती है तो आतंकवादियों को इसमें एतराज क्यों है ?
तब प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या ये आतंकवादी सच में धर्म के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं ? क्या वाकई में ये जनता के हितैषी है ? क्या इनकी माताओं ने इन्हे मासूमों की हत्या के लिए जन्म दिया था ?
सच में इनके अंतःकरण में मानवीय सभ्यता का नाश हो चूका है जो केवल और केवल नफरत, हिंसा ,जैसे जघन्य अपराधों को जन्म दे सकता है /पाकिस्तान में मारे गए बच्चों के अभिभावकों के हृदय की क्या स्थिति होगी उसे समझने में मुझे लगता है कोई बड़ी बात नही होगी क्योंकि यदि ऐसी घटनाएँ हमारे यहाँ होती तो हम अंदाजा लगा सकते है लेकिन इसमें पाकिस्तानी नागरिकों की भी उतनी ही जिम्मेदारी है क्योंकि जो दूसरों से नफरत करते है और दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करते है तो निश्चित ही स्वम को उस मंजर में उलझना पड़ता है यही स्थिति आज पाकिस्तान की है
प्रदीप कुमार गौतम
