Wednesday, 29 January 2014

गुलाबी जाम

बस उसकी एक मुस्कान चाहिए
दिल नाजुक है उस पर एक जान चाहिए
मर मिटे हैं हम उसकी खातिर
बस उससे मुहब्बत का पैगाम चाहिए
सदा खेलते हैं केश अधरों से उसके
बस अधरों से उसके गुलाबी जाम  चाहिए
उसकी  निगाहों का नशा है बड़ा कातिल
उस पर मदहोश आराम चाहिए
उसकी लचकीली कमर का जादू है ऐसा
जिस पर गौतम का सलाम चाहिए

                                                      प्रदीप कुमार गौतम
                                                          २९/०१/1४

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