बस उसकी एक मुस्कान चाहिए
दिल नाजुक है उस पर एक जान चाहिए
मर मिटे हैं हम उसकी खातिर
बस उससे मुहब्बत का पैगाम चाहिए
सदा खेलते हैं केश अधरों से उसके
बस अधरों से उसके गुलाबी जाम चाहिए
उसकी निगाहों का नशा है बड़ा कातिल
उस पर मदहोश आराम चाहिए
उसकी लचकीली कमर का जादू है ऐसा
जिस पर गौतम का सलाम चाहिए
प्रदीप कुमार गौतम
२९/०१/1४
दिल नाजुक है उस पर एक जान चाहिए
मर मिटे हैं हम उसकी खातिर
बस उससे मुहब्बत का पैगाम चाहिए
सदा खेलते हैं केश अधरों से उसके
बस अधरों से उसके गुलाबी जाम चाहिए
उसकी निगाहों का नशा है बड़ा कातिल
उस पर मदहोश आराम चाहिए
उसकी लचकीली कमर का जादू है ऐसा
जिस पर गौतम का सलाम चाहिए
प्रदीप कुमार गौतम
२९/०१/1४
