प्रिय साहित्य मित्र अरविंद भारती जी द्वारा रचित "युद्ध अभी जारी है" नामक कविता संग्रह चार दिन पूर्व प्राप्त हुआ । यह 95 कविताओं का एक सशक्त काव्य संग्रह है । जिसमें दलित एवं स्त्री की पीड़ाओं को अभिव्यक्त किया गया है । भारती जी की पहली कविता 'कैद में हूँ' से कविता संग्रह में व्याप्त सामग्री का मार्ग प्रशस्त करती है । भारतीय समाज में जातिगत व्यवस्था के कारण मनुष्य से मानव होने का अधिकार छीन लिया जाता है और जाति उसके पीछे दौड़ने लगती है । जहाँ व्यक्ति जाता है वहाँ जाति पहुँच जाती है । यदि कोई नवयुवक सूट बूट पहने हुए है, तो उससे उसकी जाति जानने के लिए नाम पूछा जाएगा , जब नाम से संतुष्ट नही हुए , तो पूरा नाम , गाँव का पता पूछा जाएगा और जैसे ही उसकी जाति की जानकारी हुई । वैसे ही दूषित मानसिकता के लोग उस नवयुवक से इस तरीके से व्यवहार करने लगते हैं, कि उसने कोई अपराध कर दिया हो । अरविंद भारती जी इस संदर्भ में अपनी कविता 'कैद में हूँ' में कहते हैं-
"और
जहाँ नही पहुँच पाती
वहाँ पूछते हैं नाम
पूरा नाम और पता
करते हैं एक्स-रे
कभी इस एंगिल से
कभी उस एंगिल से
जैसे मैं किसी और ग्रह का प्राणी हूँ
असल में जानना चाहते हैं जाति मेरी ।
इस तरह अरविंद भारती जी ने पूरे कविता संग्रह में जातीय पीड़ा से ग्रसित लोगों की समस्याओं को उजागर किया है ।
अभी मात्र साधारण चर्चा की गई है आगे बहुत जल्द भारती जी के कविता संग्रह की समीक्षा आप सभी की मध्य प्रस्तुत होगी ।
कविता संग्रह प्रेषित करने हेतु भारती जी का आभार
प्रदीप कुमार गौतम
शोधार्थी, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी
मोबाइल-8115393117