Sunday, 28 December 2025

अब भी समय है


मत कहो कि उम्र ढल गई,
मत कहो कि मौका निकल गया,
जो साँस अभी चल रही है भीतर,
समझो—जीवन ने फिर पुकारा है।
हर हार एक सबक लिख गई,
हर आँसू कुछ सिखा गया,
जो टूटा था, वह कमजोर नहीं,
वह बस अगली उड़ान की तैयारी में था।
भीड़ बहुत है इस दुनिया में,
पर दिशा बहुत कम के पास है,
जो खुद से लड़ना सीख गया,
वही असली इतिहास रचता है।
मत ढूँढो ताली हर कदम पर,
खामोशी भी इंकलाब है,
जो चुपचाप रोज़ बेहतर बने,
वही सबसे बड़ा जवाब है।
अगर डर रास्ता रोक ले आज,
तो उससे आँख मिला कर कहना—
मैं गिरा हूँ, हारा नहीं,
और अब भी समय है…
खुद को जीतने का।
© डॉ प्रदीप कुमार

No comments:

Post a Comment

धम्म-पथ

बुद्ध ने कहा— जीवन दुःख है, पर यह अंतिम सत्य नहीं, क्योंकि दुःख-निरोध भी है। तृष्णा से बँधा मन बार-बार जन्म लेता है, और सम्यक दृष्टि उसे मुक...