Sunday, 28 December 2025

बुद्ध की राह


उन्होंने कहा—
दुःख है,
पर उससे भागो मत,
उसे समझो।
उन्होंने कहा—
ईश्वर बाहर नहीं,
मन के भीतर है,
जहाँ लालच शांत हो
और करुणा जागे।
न उन्होंने तलवार उठाई,
न सिंहासन चाहा,
उन्होंने मनुष्य को
मनुष्य होना सिखाया।
जहाँ क्रोध था,
वहाँ मौन रखा,
जहाँ अंधविश्वास था,
वहाँ प्रश्न खड़ा किया।
बुद्ध ने कहा—
न किसी से घृणा करो,
न किसी पर अधिकार,
क्योंकि बंधन
दूसरों से नहीं,
अपनी इच्छाओं से बनते हैं।
आज भी जब
हिंसा थक जाती है,
और संसार
शांति ढूँढता है,
तो बुद्ध की दृष्टि
मनुष्य को
स्वयं से मिलने का
रास्ता दिखाती है।
©डॉ प्रदीप कुमार 

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