शिक्षित बनो,
क्योंकि अज्ञान
सबसे गहरी गुलामी है।
उन्होंने कहा—
संगठित रहो,
क्योंकि बिखरी हुई भीड़
इतिहास नहीं रचती।
और फिर उन्होंने जोड़ा—
संघर्ष करो,
क्योंकि अधिकार
माँगे नहीं जाते,
जीते जाते हैं।
बाबा साहेब ने
भगवान से पहले
संविधान दिया,
और आस्था से पहले
विवेक।
उन्होंने सिखाया—
मनुष्य बड़ा
जन्म से नहीं,
कर्म और चेतना से होता है।
जहाँ बराबरी नहीं,
वहाँ धर्म नहीं—
यह उनका
सबसे क्रांतिकारी विचार था।
आज भी जब
कोई झुकी गर्दन उठती है,
कोई दबा हुआ
बोलने लगता है,
तो समझो—
बाबा साहेब
ज़िंदा हैं।
©डॉ प्रदीप कुमार
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