ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ SC/ST ऑर्गनाइजेशन (रजि0) के तत्वावधान में 23 नवम्बर 2019 को 70वां संविधान दिवस व राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर, 15 जनपथ, नई दिल्ली के भीम आडोटोरियम में किया गया । जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल उपस्थित रहे । जनपद जालौन के राजेन्द्र नगर उरई के रहने वाले प्रदीप कुमार गौतम को 'डॉ अम्बेडकर डिग्निटी अवार्ड- 2019 से सम्मानित किया गया । यह अवार्ड संस्था के अध्यक्ष बी.एस. भारती व महासचिव के.पी. चौधरी के हाथों से प्रदान किया गया । यह अवार्ड प्रत्येक वर्ष सामाजिक क्षेत्र में डॉ. अम्बेडकर की विचारधारा को प्रचारित-प्रसारित करने व सामाजिक जागरूकता, कुरीति, अंधविश्वास, आडम्बर से दूर करने में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों को दिया जाता है । प्रदीप कुमार गौतम छात्र जीवन से की सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं राजनैतिक गतिविधियों संलग्न रहे हैं । शुरुवाती दिनों में बामसेफ से जुड़ाव रहा तथा कैडर के तौर पर 11th से लेकर एम0 ए0 तक जुड़कर प्रशिक्षण लिया व अपने जूनियरों को ट्रेनिंग प्रदान की । 2012 में आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति व रविदास विकास संस्थान के संपर्क में आये तथा बतौर सदस्य काम किया । 2012 से लेकर 2014 तक आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति(ABSS) में युवा मंडल अध्यक्ष की भूमिका निभाई । 2014 में बहुजन युवाओं के लिए काम करने वाले छात्र संगठन डॉ. अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI) से जुड़े तथा 2018 तक क्रमशः बुंदेलखंड प्रवक्ता, प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आदि पदों में रहकर छात्र हितों को लेकर काम किया व युवाओं को बहुजन आंदोलन से जोड़ने का काम किया, जिसमें महात्मा बुद्ध, कबीर, रैदास, बिरसा मुंडा, फुले, पेरियार, बाबा साहेब व विभिन्न बहुजन महापुरुषों की वैचारिकी पर काम किया । प्रदीप कुमार वर्तमान समय में हिंदी विभाग गाँधी महाविद्यालय, उरई में शोध छात्र हैं और युवा लेखक, आलोचक व कथाकार के तौर पर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में शोध आलेख, आलोचनाएं व लघुकथाएँ प्रकाशित होती रहती हैं । इनके द्वारा संपादित 'बहुजन महानायिकाएँ ( सावित्रीबाई फुले से गौरी लंकेश तक) चर्चित पुस्तकों में है ।
साहित्य वह है, जो आपको धर्म, जाति, लिंग व क्षेत्रवाद के भाव से ऊपर उठाकर समाज में समता बंधुत्व एकता का भाव प्रकट करे . मानवीय संवेदनाओं से पूर्ण करके प्रत्येक प्राणी से प्रेम करना सिखाये और दलित संस्कृति इसी भाव को लेकर सदियों से लोक कला एवं साहित्य को संजोकर वर्तमान समय में मानवीय संवेदनाओं की सतत निर्मल धारा को बहा रहा है .
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