Monday, 12 June 2017

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चेतना स्फूर्ति को भरकर
सुबह जब दस्तक देती है
आलस्य को त्यागकर तब
जागना होता है
मन शांत चित्त होकर
अपने आराध्य का आराधन करता है
किन्तु जब अखबारों में
यकायक नजर पड़ती है
वही नित्य की लूट खसोट
अपराधों लगा हो जमावड़ा जैसे
स्त्री का स्त्री के साथ दुर्व्यवहार
तो सवर्णों का दलितों पर
दलितों का प्रशासन पर
हिंदुओं का मुस्लिम पर
चारो ओर हाहाकार चीख पुकारों की खबरें
मन को गहरे झंझावातों में ले जाकर
हृदय में सुबह से ही उलझन पैदा कर देती है
आखिर कब मनुष्य मानवता को स्वीकार करेगा
कब मनुष्य से मानवता का व्यवहार करेगा ।

           प्रदीप कुमार गौतम
शोधार्थी, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी

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