जब भारत देश की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक , धार्मिक उन्नति के आंदोलन की बात करते हैं , तो उसमे सबसे पहला नाम डॉ भीमराव अंबेडकर का आता है । आज हर व्यक्ति बाबा साहेब की नीतियों को स्वीकार कर रहा है, तारीफ कर रहा है , योद्धा स्वीकार रहा है किंतु जैसे ही पटापेक्ष पर पहुँचते है तो अधिकतर सवर्ण मानसिकता के लोग गालियाँ देते मिलते है ।
साहित्य वह है, जो आपको धर्म, जाति, लिंग व क्षेत्रवाद के भाव से ऊपर उठाकर समाज में समता बंधुत्व एकता का भाव प्रकट करे . मानवीय संवेदनाओं से पूर्ण करके प्रत्येक प्राणी से प्रेम करना सिखाये और दलित संस्कृति इसी भाव को लेकर सदियों से लोक कला एवं साहित्य को संजोकर वर्तमान समय में मानवीय संवेदनाओं की सतत निर्मल धारा को बहा रहा है .
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धम्म-पथ
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