प्रदीप कुमार गौतम
शोधार्थी, गाँधी महाविद्यालय,उरई
जनपद-जालौन(उ0प्र0)
मोबाइल-81153931157
आज से हाईस्कूल इण्टर और उच्च शिक्षा में बी0ए0, बीएस0 सी, की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गयी हैं । लेकिन बोर्ड शब्द नाम मात्र के लिए है, क्योंकि 2002 में मुलायम सिंह यादव जी के शासन सत्ता में आने के बाद उन्होंने सबसे पहले नकल अध्यादेश वापिस ले लिया था और प्रदेश भर के सेंटरों को स्थाई कर दिया गया था । जिससे बोर्ड जैसी परीक्षा मूक बधिर हो गयी और नकल का अंबार छाने लगा तथा निजीकरण के चलते स्कूलों की बाढ़ सी आ गयी । खुद को बेहतर साबित करने के लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों के प्रबंधकों ने सिद्धांतो को ताक पर रखकर नक़ल कार्रवाई और नकल का प्रभाव ऐसा बढ़ा कि नकल करवाने , छात्रों को पास करवाने के ठेके उठने लगे और शिक्षा का स्तर धीरे-धीरे नीचे खिसकने लगा । आज निजीकरण ने शासकीय, अशासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों में ताला डालने की कगार पर खड़ा कर दिया है क्योंकि इन कॉलेजों में नकल सामग्री की उचित व्यवस्था मुहैया नही कराई जाती है । ऐसे में छात्र व अभिभावक सर्वाधिक अंक पाने की चाहे में निजी कॉलेजों में प्रवेश लेते हैं । जहाँ उन्हें बिना कुछ पढ़े ही बेहतर अंक प्राप्त होते है । ऐसा नही है कि नकल के बारे में सरकार, राज्यपाल, कुलपति को ज्ञात न हो उन्हें इनके बारे में भलीभांति सब कुछ ज्ञात है । लेकिन वे भी धनार्जन करने में संलग्न समझ में आते हैं । समाज का पैरोकार मानने वाले लोग सर्वाधिक इस व्यवस्था के भागीदार हैं । ऐसे महाविद्यालयों के प्रबंधकों को मंचो से बड़े आदर्श के उपदेश देते सुना है लेकिन हकीकत में वे एक युवा पीढ़ी को गर्त में डालने का काम कर रहे हैं जिसमें शासन प्रशासन मुख्य रूप से दोषी हैं ।
आज नकल के चलते प्रत्येक छात्र के 70-80 % से नंबर कम नही आ रहे है, इसमें वो लोग हताश है, जिन्होंने नकल से नही बल्कि अक्ल से पढाई करके परीक्षा पास की है, क्योंकि पुलिस से लेकर btc तक सभी वैकेंसी अंको को आधार बनाकर भरी जा रही है । जिससे कम अंक प्राप्त करने वाले युवाओं के हृदय में हताशा घर कर लेती है । आज के युवा को यह ज्ञात ही नही हो पाता है कि जिस नकल से आज हम उपाधियाँ हासिल कर रहे हैं, कल यही उपाधियाँ हमारी अयोग्यता को दर्शाकर सभी के मध्य हंसी का पात्र बना देगी या अयोग्यता के रहते भी यदि कहीं जुगाड़ से नौकरी हासिल कर भी ली तो कई लोगों के भविष्य को बर्बाद करने में सबसे बड़ा दोषी भी साबित होगा ।
एन केन प्रकारेण नकल आज का सबसे बड़ा सच है जिसकी जड़े बहुत गहरी हो चुकी है और युवाओं का भविष्य अंधकारमय है । केवल शासन ही इसमें कुछ बड़ा परिवर्तन कर सकता है । अभिभावकों से लेकर छात्रों , प्रबंधको से लेकर अध्यापकों , कुलाधिपति से लेकर कुलपति , प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक को इस विषय में चिंतन करने की जरुरत है क्योंकि एक सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए नक़ल जैसी बुराई को समाप्त करना होगा ।
साहित्य वह है, जो आपको धर्म, जाति, लिंग व क्षेत्रवाद के भाव से ऊपर उठाकर समाज में समता बंधुत्व एकता का भाव प्रकट करे . मानवीय संवेदनाओं से पूर्ण करके प्रत्येक प्राणी से प्रेम करना सिखाये और दलित संस्कृति इसी भाव को लेकर सदियों से लोक कला एवं साहित्य को संजोकर वर्तमान समय में मानवीय संवेदनाओं की सतत निर्मल धारा को बहा रहा है .
Thursday, 16 March 2017
वर्तमान शिक्षा में नकल
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