Sunday, 15 December 2013

मोहब्बत

मोहब्बत चीज ही ऐसी है
 कभी होती है अपनों से
 कभी होती है सपनों से
 कभी अन्जान राहों से
 कभी गुमनाम नामों से
मोहब्बत चीज ही ऐसी है.....

कभी होती है फूलों से
 कभी बचपन के झूलों से
 कभी बेइख्त्यारी में
 कभी पक्के उसूलों में
 मोहब्बत बस मोहब्बत है
 मोहब्बत एक इबादत है .

मुहब्बत चीज ही ऐसी है …
दुखों में रुला देती है
,दर्द अनमोल देती है  है
,मोहब्बत चीज  ही  ऐसी  है.................  

                                                                प्रदीप कुमार गौतम
                                                                 १५/१२/२०१३

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