लघुकथा
(प्रदीप कुमार गौतम)
वह शूद्र है
(प्रदीप कुमार गौतम)
वह शूद्र है
सभी प्राध्यापकों का प्रिय होने की वजह से आज एम0 ए0 की मौखिकी में परीक्षा सहयोग हेतु उसे भी बुला लिया गया । परीक्षा सम्पन्न होने के बाद रामराज सर ने उससे बोला कि जाओ भोजन हेतु मिश्रा सर को भी बुला लो ।
उसने मिश्रा जी से कहा सर आपको रामराज सर भोजन के लिए बुला रहे है । वे अचानक उखड़ गए एवं चीखते हुए बोले रामराज शूद्र हैं और मैं शूद्रों के साथ भोजन नही करता । यह सुनकर वह आवाक रह गया वह सोचने लगा कि रामराज सर तो ओबीसी है फिर इनसे इतनी जब इनसे इतनी घृणा तो मैं तो sc चमार हूँ मुझसे कितनी घृणा होगी इन्हें यह सोचते हुए वह करुणा में डूब गया ।
उसने मिश्रा जी से कहा सर आपको रामराज सर भोजन के लिए बुला रहे है । वे अचानक उखड़ गए एवं चीखते हुए बोले रामराज शूद्र हैं और मैं शूद्रों के साथ भोजन नही करता । यह सुनकर वह आवाक रह गया वह सोचने लगा कि रामराज सर तो ओबीसी है फिर इनसे इतनी जब इनसे इतनी घृणा तो मैं तो sc चमार हूँ मुझसे कितनी घृणा होगी इन्हें यह सोचते हुए वह करुणा में डूब गया ।
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