Thursday, 1 December 2016

मेरी मधुर शायरियाँ

1.इन नशीली आँखों ने क्या सितम ढाया है
   इन गुलाबी अधरों ने दिल को ज़ोरों से धढकाया है ।
   सर्पणी सम है यह कटि तुम्हारी
   जिसने इस धरातल को चक्र सम घुमाया है ॥

2.ये मुस्कान दिलेहाल बयां कर रही है
    ये केश चन्द्र मुख का श्रंगार कर रहे है ।
    थोड़ी-सी हया कर लो ओ दिलवर
    यह मादक अवयव जवां होने का अहसास कर रहा है ॥

3.आपके चेहरे की मुस्कान की बात क्या करें ।
   उससे नजर हटाने का दिल नहीं करता ॥

4. तुम्हें चाँद का नूर कहूँ
   या कोयले से निकला कोहनूर कहूँ ।
   ये सम्पूर्ण धारा भी तुम्हारी  सजदा कर दे
   ऐसी मनोहर अनोखी मूर्ति कहूँ  ॥ 

5.हर दिन सोचता हूँ बात करूँ
   तुम्हारे पास आकर तुमसे मुलाकात करूँ ।
   दिन बीत गए कुल उन यादों के ।
   सोचता हूँ पहले वाले दिनों की शुरुवात करूँ ।।

6.तुम्हारे अधरों की रोमानियत कोई सुरूर तो है ।
    दिल के जज्बातो में कोई मगरूर तो है ।
    हमसे भी प्यार भरे लफ्ज़ बयाँ कर लिया करो ।
    हमसे ही तुम्हारी शान है फिर यह गरूर क्यों है ?
.........प्रदीप कुमार गौतम

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