फ्री-फ्री का भारत देश में चक्कर चल गया
आज हर युवा में जियो का क्रेज चल गया ।
भूखा है प्यासा है हर नौजवान
पर जियो में लगन लगी है वाह रे इंसान ।
मोदी तूने डिजिटल कह कहकर बर्बाद कर दिया
सच कहूँ तो तूने अम्बानी का टेम्पो हाई कर दिया ।।
साहित्य वह है, जो आपको धर्म, जाति, लिंग व क्षेत्रवाद के भाव से ऊपर उठाकर समाज में समता बंधुत्व एकता का भाव प्रकट करे . मानवीय संवेदनाओं से पूर्ण करके प्रत्येक प्राणी से प्रेम करना सिखाये और दलित संस्कृति इसी भाव को लेकर सदियों से लोक कला एवं साहित्य को संजोकर वर्तमान समय में मानवीय संवेदनाओं की सतत निर्मल धारा को बहा रहा है .
Archive
-
▼
2016
(14)
-
▼
December
(13)
- युवा उदास क्यों है ?
- ओमप्रकाश वाल्मीकि के साहित्य मेँ दलित प्रतिरोध (शो...
- 🌺बाबा साहेब अम्बेडकर पर आयोजित हुई मथुराप्रसाद मह...
- उच्च शिक्षा और आरक्षण
- राजनीति से घिन आने लगी है ।
- संविधान
- तूने अम्बानी का टेम्पो हाई कर दिया ।
- ओस की बूँद
- मोदी जी ऐसे काम न चलेगा
- साहित्यकारों की भी जाति होती है
- ओस की बूंद कहूँ
- मेरी मधुर शायरियाँ
- पाँच सौ करोड़ की शादी
-
▼
December
(13)
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
धम्म-पथ
बुद्ध ने कहा— जीवन दुःख है, पर यह अंतिम सत्य नहीं, क्योंकि दुःख-निरोध भी है। तृष्णा से बँधा मन बार-बार जन्म लेता है, और सम्यक दृष्टि उसे मुक...
-
प्रदीप कुमार,शोधार्थी, बी0 यू0, झाँसी ...
-
भारतीय समाज मे आज केवल स्त्री ही नही बल्कि पुरुष भी प्रताड़ित है, इसका दायरा हो सकता है स्त्री से कम हो लेकिन पुरुष का भी मानसिक रूप से जमकर ...
-
मेढ़क-मेढ़की(लघुकथा) ......प्रदीप कुमार गौतम जून का माह, भीषण गर्मी से लोग बेहाल, पसीने से लथपथ, अंगौछे से बार-बार मुँह पोछते लोगों के चे...
No comments:
Post a Comment