क्या कारण है ?
जो युवा आज हताश है
खुद की ज़िंदगी के निर्णय के लिए
बेवश और लाचार है
हर ओर बेरोजगारी की ही
क्यों लगी चीख पुकार है ?
नौकरी का ही
आज क्यों सम्मान है ?
क्या योग्यता के कोई मायने नहीं है ?
क्या उच्चशिक्षित होना गुनाह है ?
या तंत्र भ्रष्ट कहकर दिल को शांत कर लूँ
समाज की सोच में आखिर
इतना परिवर्तन क्यों आया ?
उसके मन मे सरकारी नौकरी का ही
क्यों खयाल है ?
जिधर नजर उठाओ
उधर युवा ही क्यों उदास है ?
सरकारी नौकरी का
ये क्रेज क्यों कर दिया ?
मेहनत कश युवा को
मजदूर सम क्यों कर दिया ?
शिक्षा को दोष है
या शिक्षा माफियाओं का
भरे बाजार मे डिग्रियों का
मोल क्यों कर दिया ?
निजीकरण ने आखिर यह खेल कर दिया
रोजगार रहित और डिग्री सहित कर दिया ।
जो युवा आज हताश है
खुद की ज़िंदगी के निर्णय के लिए
बेवश और लाचार है
हर ओर बेरोजगारी की ही
क्यों लगी चीख पुकार है ?
नौकरी का ही
आज क्यों सम्मान है ?
क्या योग्यता के कोई मायने नहीं है ?
क्या उच्चशिक्षित होना गुनाह है ?
या तंत्र भ्रष्ट कहकर दिल को शांत कर लूँ
समाज की सोच में आखिर
इतना परिवर्तन क्यों आया ?
उसके मन मे सरकारी नौकरी का ही
क्यों खयाल है ?
जिधर नजर उठाओ
उधर युवा ही क्यों उदास है ?
सरकारी नौकरी का
ये क्रेज क्यों कर दिया ?
मेहनत कश युवा को
मजदूर सम क्यों कर दिया ?
शिक्षा को दोष है
या शिक्षा माफियाओं का
भरे बाजार मे डिग्रियों का
मोल क्यों कर दिया ?
निजीकरण ने आखिर यह खेल कर दिया
रोजगार रहित और डिग्री सहित कर दिया ।
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