Saturday, 17 December 2016

युवा उदास क्यों है ?

क्या कारण है ?
जो युवा आज हताश है
खुद की ज़िंदगी के निर्णय के लिए
 बेवश और लाचार है
हर ओर बेरोजगारी की ही
क्यों लगी चीख पुकार है ?
नौकरी का ही
आज क्यों सम्मान है ?
क्या योग्यता के कोई मायने नहीं है ?
क्या उच्चशिक्षित होना गुनाह  है ?
या तंत्र भ्रष्ट कहकर दिल को शांत कर लूँ
समाज की सोच में आखिर
इतना परिवर्तन क्यों आया ?
उसके मन मे सरकारी नौकरी का ही
 क्यों खयाल है ?
जिधर  नजर उठाओ
उधर युवा ही क्यों  उदास है ?
सरकारी नौकरी का
 ये क्रेज क्यों कर दिया ?
मेहनत कश युवा को
 मजदूर सम क्यों कर दिया ?
शिक्षा को दोष है
या शिक्षा माफियाओं का
भरे बाजार मे डिग्रियों का
मोल क्यों कर दिया ?
निजीकरण ने आखिर यह खेल कर दिया
रोजगार रहित और डिग्री सहित कर दिया ।

No comments:

Post a Comment

धम्म-पथ

बुद्ध ने कहा— जीवन दुःख है, पर यह अंतिम सत्य नहीं, क्योंकि दुःख-निरोध भी है। तृष्णा से बँधा मन बार-बार जन्म लेता है, और सम्यक दृष्टि उसे मुक...