1. कोई करता है सजदा वीरों से
कोई करता है सजदा फकीरों से ।
हम तो श्रंगार के पुजारी हैं
ये सिर झुकता है नाजुक से फूलों मे ॥
2. तुम्हें आसमान का चाँद कहूँ
या बादलों से टपकती हुई ऑस की बूँद कहूँ ।
तू है ऐसी की नूर-ए-हुस्न का इक़बाल नहीं लफ़्जों में
शीतल हवाओं के झोकें से हिलती हुई कदंब की पाती कहूँ ॥
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