1.
हमने भी बहुत नजारे देखे हैं ।
चमकते हुए चांद सितारे देखे हैं ।।
जो कल थे उरूज पर शेखर -
आज वो बेचारे देखे हैं ।।
2.
कागज की नाव कब तक चलाओगे ।
गल जाएगी जिस वक्त गोता बहुत खाओगे ।।
संभल के चलो कुछ बिगड़ा नही शेखर -
ठोकरों की नसीहत से बहुत ऊंचे जाओगे ।।
3.
लक्ष्य नही जिसका पास क्या करेगा ।
पथ विहीन जंगल अभ्यास क्या करेगा ।।
पग-पग पर भंवर गहरे समुद्र में-
होश नही जिसको एहसास क्या करेगा ।।
4.
खोजा है जिसने पथ लक्ष्य तक जाने का ।
गुंजाइश नही रहती बहाना बनाने का ।।
तन मन से समर्पित इरादा नेक हो शेखर -
मंजिल कदम चूमती प्रतिफल जमाने का ।।
5.
काबिलियत की कीमत होती जहां में ।
वास्तविकता हो शेखर तेरे ज्ञान में ।।
यो तो आये हजारों चले गए गर्त में -
सर झुकाते है लाखों कदर दान शान में ।।
1.
कविता मेरीे दिल के उद्गार है ।
नकल न किसी की मन विचार है ।।
अलंकार न सही शब्दों का ताल मिल -
किसी को क्या मिले मेरा सुखसार है ।।
2.
समुद्र की लहरें आती और जाती है ।
पैदा हुए विचार मन को हिलाती है ।।
मन से बुद्धि का होता है टकराव -
विचारों की उच्चता जीवन की थाती है ।।
3.
स्वप्न आते है सोते और जागते ।
ठहराव नही जिनका चले जाते भागते ।।
जागते हुए ख्वाब चाहते कुर्बानी-
शेखर लगन सच्ची सदैव रहते आंकते ।।
4.
अनुभव ही कवित्त की अभिव्यक्ति है ।
अंतस की ऊर्जा मानव की शक्ति है ।।
मानुष के विचार पटल पर उतरिए-
श्रद्धा समर्पण करुणा, दया, भक्ति है ।।
5.
शेखर ने विचारों की माला बनाई है ।
छंद बद्ध कर लड़ियाँ पहनाई हैं ।।
भावों के आंगन में घूम-घूम छंद लिखे-
लोक कवियों की भरपाई है ।।
6.
हमारा दिल दरिया है उसे नाली न समझना ।
शेखर सच कहें तो उसे गाली न समझना ।।
आपसे मुहब्बत है विचारा नही शेखर-
मैं इंसान हूँ , मुझे बवाली न समझना ।।
7.
सोचो जरा सोचकर साथ क्या जाएगा ।
बोया बीज बबूल का आम कहाँ से खायेगा ।
सब जानते अपने कर्मों की कमाई शेखर-
फिर भी न संभला ताउम्र पछतायेगा ।।
8.
पैसे के अभाव में जी रहे शेखर ।
न कुछ लेकर आये न जायेंगे लेकर ।।
धन की चकाचौंध में खो गया आदमी-
जिंदगी के संघर्ष में गम पी रहे शेखर ।।
9.
पचास पार कर गए उम्र-ए दराज को ।
सीख न पाया जीने के अंदाज को ।।
जिया हूँ पर कला न आई जीने की -
कैसे करें शेखर बुलन्द आवाज़ को ।।
10.
आज के दौर में काम न ईमान का ।
लच्छेदार भाषण काम हो बेईमान का ।।
चालाकी चतुराई चंचलता लबा-लब-
मौका लगे चूके न हीरा जहां का ।।
11.
नेता कहकर आप मुझे गाली न दो ।
देना ही है प्याली भर खाली थाली न दो ।।
तुम्हारी मुहब्बत ही काफी है शेखर -
नोट दस का देना सौ का जाली न दो ।।
12.
धन नही धर्म नही आदमी न काम का ।
लक्ष्मी से पूजा जाए भाल हो हराम का ।।
चरित्र और ईमान बेकार का झमेला है-
शेखर ये नजरिया बन गया आवाम का ।।
13.
खुद का परिवर्तन हो तो परिवर्तन नही होता ।
वर्तनों में टूट जाये वो वर्तन नही होता ।।
वैश्याओं की कीमत नही समाज मे शेखर-
इंसानियत से महरूम वो नर्तन नही होता ।।
14.
खून-खून से अब इतराने लगा है ।
इस खून को बनाने में जमाना लगा है ।।
कितने हसीन सपने थे उस कलाकार के-
समर्थ होकर वो ठुकराने लगा है ।।
15.
जरा क्या उठ गए बदलने लगे लोग ।
दुश्मनों की चालें चलने लगे लोग ।।
जिनकी मेहनत से ऊंचाई मिली है-
उसी को शेखर कुचलने लगे लोग ।।
16.
अपना अजीज जब कोई ऊंचाई पाता है ।
दिल झूम के इस कदर मचल जाता है ।।
मानो जमाने की खुशियाँ मिली हो शेखर
उसकी मुफ़लिसी पर वो क्यों इतराता है ।।
17.
मन को सुख वहाँ मिलता है शेखर ।
मुरझाया फूल जहाँ खिलता है शेखर ।।
प्रीत जहाँ अपमानित हो प्यारे-
मुस्काता पुष्प वहाँ ढलता हो शेखर ।।
18.
हम जहाँ से चले थे फिर वहीं आ गए ।
पैसा क्या हो गया कि वो हमें भा गए ।।
ज्ञान मान धन धान छीना था आपसे -
खिसकी थी थोड़ी जमीन फिर वो छा गए ।।
19.
सौदा जमीर का न कर सके आज तक ।
आभाव के भाव दिल मे रहे समाज तक ।।
हर दर्द का रिश्ता दर्द से जोड़ता शेखर-
बेहया को क्या हया गिर जाती गाज तक ।।
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