मान्यवर साहब के 60 वे जनदिवस पर निम्नपक्तिया।
पद दलित रहे वे मूक सदा ।
इंसान न समझे जाते थे । ।
भूखे रख कर भी सेवा करना ।
मिल जाये तो जूठन खाते थे ।।
परछाई से छूत लगे गर्दन में हांडी लटकते थे ।
पद चिन्ह रहे न भूतल पर झाँकर भी बंधे जाते थे ।।
मेटन को घोर विषमता कोई देवो नही दिखलाते थे ।
भारत मे देवा बहुत हुए शुद्रो के काम न आते थे ।।
पग पग पर कांटे चुभते थे ।
दिन रात सताए जाते थे । ।
कुत्ते बिल्ली का हक ज्यादा ।
शेखर नहक हिदू कहलाते थे ।।
हे बाबा ऋणी रहेगा भारत तुमने कलंक मिटाया है।
सदियों से रोती मानवता को तुमने गले लगाया है । ।
शेखर सत्त सत्त नमस्कार उपकार न भुला जाएगा ।
भूल गया जो भूलेगा ही माँ का दूध लजाये गा ।
पद दलित रहे वे मूक सदा ।
इंसान न समझे जाते थे । ।
भूखे रख कर भी सेवा करना ।
मिल जाये तो जूठन खाते थे ।।
परछाई से छूत लगे गर्दन में हांडी लटकते थे ।
पद चिन्ह रहे न भूतल पर झाँकर भी बंधे जाते थे ।।
मेटन को घोर विषमता कोई देवो नही दिखलाते थे ।
भारत मे देवा बहुत हुए शुद्रो के काम न आते थे ।।
पग पग पर कांटे चुभते थे ।
दिन रात सताए जाते थे । ।
कुत्ते बिल्ली का हक ज्यादा ।
शेखर नहक हिदू कहलाते थे ।।
हे बाबा ऋणी रहेगा भारत तुमने कलंक मिटाया है।
सदियों से रोती मानवता को तुमने गले लगाया है । ।
शेखर सत्त सत्त नमस्कार उपकार न भुला जाएगा ।
भूल गया जो भूलेगा ही माँ का दूध लजाये गा ।
मान्यवर साहब
धन्य धन्य श्री कांशीराम जी सारे बन्धन तोड़ दिए ।
मुर्दो में डाली जान फूंक मुँह के ताले तोड़ दिए ।।
दलित पीड़ित जाग उठे शेखर जो संघर्ष किये ।
बहुजन समाज की उम्र लगे जो आपने उपकार किये ।।
दिशा छोड़ दुदर्शा करा दी जब से चुप्पी साधी है ।
बहुजन की आशा के दीपक कैसी आयी बर्बादी है ।।
कहाँ गया परिवर्तन नारा कहाँ गयी समता की धारा ?
धन वाला धनवान हो गया डाल गए माया को हार ।
टिकट बेच रहे लाखो में लगा रहे धन को भंडार ।।
डॉन माफिया हावी हो रहे बहुजन भैया करो विचार।।
जिनके कारण बनी बीएसपी अब वे ही हमारे नेता हैं ।
शान-मान सम्मान छीन लाओ चिरित्र हीन अभिनेता हैं ।।
निर्धन तो निर्धन बन बैठा देकर अपनी शान और आन ।
सत्ता का सुख भोगेगे और पाएगे हम सम्मान ।।
जिनको चुनकर भेज रहे वे धन वालों के रखवाले हैं।
वोट दे रहे खुटा पे फिर भी दिल के है काले ।।
कैसे परिवर्तन होगा, अब बहुजन जरा बताओ तुम।
शोषक ही अपने मालिक है, जरा होश में आओ तुम ।।
पहचान करो असली- नकली की
अपने कौन पराये है ।
बहुजन की नइयां में बैठ छेद करन को आये हैं ।।
इतिहास गवाही देता है नही बने दिल से समर्थन ।
जब जब मौका मिला ताज का शेखर निकले वो घाटी ।।
एक बार फिर बोल उठो ,ओ बहुजन के दाता।
जगा जगा कर सो गए क्यों बहुजन भाग्य विधाता ।।
तुम भी जगो हम भी जागे जागो मूलनिवासी ।
मुर्दो में डाली जान फूंक मुँह के ताले तोड़ दिए ।।
दलित पीड़ित जाग उठे शेखर जो संघर्ष किये ।
बहुजन समाज की उम्र लगे जो आपने उपकार किये ।।
दिशा छोड़ दुदर्शा करा दी जब से चुप्पी साधी है ।
बहुजन की आशा के दीपक कैसी आयी बर्बादी है ।।
कहाँ गया परिवर्तन नारा कहाँ गयी समता की धारा ?
धन वाला धनवान हो गया डाल गए माया को हार ।
टिकट बेच रहे लाखो में लगा रहे धन को भंडार ।।
डॉन माफिया हावी हो रहे बहुजन भैया करो विचार।।
जिनके कारण बनी बीएसपी अब वे ही हमारे नेता हैं ।
शान-मान सम्मान छीन लाओ चिरित्र हीन अभिनेता हैं ।।
निर्धन तो निर्धन बन बैठा देकर अपनी शान और आन ।
सत्ता का सुख भोगेगे और पाएगे हम सम्मान ।।
जिनको चुनकर भेज रहे वे धन वालों के रखवाले हैं।
वोट दे रहे खुटा पे फिर भी दिल के है काले ।।
कैसे परिवर्तन होगा, अब बहुजन जरा बताओ तुम।
शोषक ही अपने मालिक है, जरा होश में आओ तुम ।।
पहचान करो असली- नकली की
अपने कौन पराये है ।
बहुजन की नइयां में बैठ छेद करन को आये हैं ।।
इतिहास गवाही देता है नही बने दिल से समर्थन ।
जब जब मौका मिला ताज का शेखर निकले वो घाटी ।।
एक बार फिर बोल उठो ,ओ बहुजन के दाता।
जगा जगा कर सो गए क्यों बहुजन भाग्य विधाता ।।
तुम भी जगो हम भी जागे जागो मूलनिवासी ।
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