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Wednesday, 14 March 2018

भीम संगीत(कविता)

भीम संगीत(कविता)
कविरत्न बी0डी0 पराग,
राजेन्द्र नगर, उरई(जालौन)
सुनो सुनावें तुम्हें कहानी भीमराव महान की ।
इंदौर जिला में प्रकटे आकर लाज बचाने शान की ।।
दलितों का संकट हरने को धार मानुष तन आये थे ।
अंधकार भव दूर यहाँ पर गम के बादल छाए थे ।।
पिता रामजी माता भीमाबाई ने अति आनन्द मनाए थे ।
छोटा था स्कूल जो पढ़ने दोनों लड़के बिठलाए थे ।।
देख आनन्द अरु भीम को जल गई छाती मास्टर बेईमान की ।
सुनो सुनावे तुम्हें कहानी.......
छुआछूत मास्टर करते थे पहले के अन्यायी
अलग दियो बैठार बालक को दिल मे दया न आई
जैसे तैसे भीमराव ने एम0 ए0 की शिक्षा पाई ।
सन 1912 में फिर अमरीका पहुँचे जाई ।।
उल्टी-सीधी चाल वीर ने देखी हिंदुस्तान की ।
सुनो सुनावें तुम्हें कहानी..........
अमरीका में रहे खुशी से कभी न दिल में दहलाए थे
पीएचडी की डिग्री पाकर बाबा मन मे हरषाए थे ।।
विद्या पढ़ने की कोशिश में अम्बेडकर लंदन धाए थे ।
बैरिस्टरी कर पास लौटकर फिर भारत में आए थे ।।
श्री गायकवाड़ बड़ौदा नरेश ने कसर न राखी दान की ।
सुनो सुनावें तुम्हें काहानी...........
चीन रूस जापान जर्मनी देश-विदेशों डोले थे ।
अंधकार में पड़े हुए बाबा ने दलित टटोले थे ।।
मुद्दत से सोते हुओं के जाग्रत कर नैना खोले थे ।
अरे ज़ालिमों जुलुम न ढाओ, ऐसे बाबा बोले थे ।।
करूँ प्रसंशा कहाँ तक मुख से ऐसे वीर महान की ।
सुनो सुनावें तुम्हें कहानी........
अति दुख मन में मान दुखी देखे लाखों नर नारी है ।
दलित जाति की बागडोर तब अपने हाथ संभारी है ।।
ज़ुल्म अछूतों पर भारी , नाहि माने अत्याचारी हैं ।
भारी ज़ुल्म सहे दुश्मन के पर हटे न कभी पिछारी हैं ।।
इंसानियत के आगे फिर चली नहीं शैतान की ।
सुनो सुनावे तुम्हें कहानी......
अति निशंक दलितों के नेता फिर लंदन को धाए थे ।
राउंडटेबल कांफ्रेंस में वीर ने वचन सुनाए थे ।।
हिस्सा अलग अछूतों का बाबा लंदन से लाए थे ।
अछुतिस्तान बने भारत में, गाँधी न सुन पाए थे ।।
लिया लूट हमें गाँधी ने धमकी देकर प्राण की ।
सुनो सुनावे तुम्हें कहानी ...........
गाँधी कहे लाज रख मेरी तेरा ही हुकुम बजाऊँगा ।
अछुटिस्तान बनने से पहले अपने प्राण गवाऊंगा ।।
जब तक दस्तख़त नही करोगे अन्न नही मैं खाऊंगा ।
करूँ भूख हड़ताल आज से तड़प-तड़प मर जाऊँगा ।।
परे पिछारी चालू गाँधी बाबा कि मति हैरान थी ।
सुनो सुनावें तुम्हें कहानी........
अगर न बाबा दस्तख़त करते, कभी स्वराज न होता था ।
इसी आजादी से पहले, दलित न सुख से सोता था ।।
अत्याचार दलितों पर होते , बच्चा-बच्चा रोटा था ।
श्री बाबू स्वाभिमानी बाबा ने, कसर न राखी आन की ।
सुनो सुनावें तुम्हें कहानी.........

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