Sunday, 10 November 2013

आज का युवा

आज फिर बात होगी
नये -नये वक्ताओं से मुलाकात होगी
सभी कि जहन में सवाल होगा
आज क्या युवा का हाल  होगा
सूखी हुई हड्डियों में जान होगी
अपने पुराने तीरों से बरसात होगी
विवेकानंद जी कि फिर संगोष्ठियाँ होगीं
जिसमें आज के युवा पर सीधी कमान होगी
बम फुटेगें ,धमाके होगें
आज युवा पर सभी के निशाने होगें
क्या किसी ने आज के
युवा को जाना है
अर्थ का युग है
टेट ,नेट ,पीएचडी ,क्या नही किया
आज के युवा ने
फिर भी वह आज बेकार है
क्यूँ क्या किसी ने सोचा है
 सरकार की  रणनीतियों से
समाज कि बेरुखी से
उसे आज हतोत्साहित
किया जाता है
ना करे कोई आज आलोचना
क्योंकि उसी ने
छुआ है आसमान
आज का युवा है
श्रेष्ठ श्रेष्ठ...............................

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