Saturday, 23 November 2013

दीवानगी


कोई तो है जो याद है
कोई तो है जो मुझे भाता है
पता नही क्या हो गया
जो दिन- रात मुझे कुछ बताता है
सिमट गये हैं दिन
उखड़ गयीं हैं राते
भूल गया सबकुछ
बीत गयीं बातें
कुछ दिल में कसक उठी
और रीत गयी पलकें


                                                                            प्रदीप कुमार गौतम

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