Friday, 1 November 2013

केश


वे इधर लहरायें ,उधर लहरायें
फिर कपोलों को आकर
कोमलता से भरकर थोड़ा
खटपट तरीके से
मेरा चुम्बन कर जाएँ।
वे नैनों के आगें आकर
फुदक -फुदक नृत्य करें
मैं उन्हें हटाऊँ तो हूँ
वे पीठ में जाकर
मधुर -मधुर गान सुनाएँ
उनकी श्यामलता को देख
स्वतः मेरा उन पर
हाथ फिर जाये। .

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